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यदि कोई अपनों और अपने परिवार की चिन्ता न करे तो अविश्‍वासी से भी बुरा है

1 तीमुथियुस 5:8 – किन्तु यदि कोई अपने रिश्तेदारों, विशेषकर अपने परिवार के सदस्यों की सहायता नहीं करता, तो वह विश्वास से फिर गया है तथा किसी अविश्वासी से भी बुरा है।

आज का सन्देश उन भाइयों और बहिनों के लिए है जो कई कारणों से अपने प्रियजनों और परिवारों से दूर हैं। अपने रिश्तेदारों के प्रति व्यक्तिगत शिकायतों के कारण वे परिवार के प्रति अपने दायित्वों को पूरा नहीं कर पाते हैं। परन्तु उन्हें स्वयं को इस सच्चाई से अवगत रखना चाहिए कि इसके परिणामस्वरूप उन्हें परमेश्‍वर के सामने धर्मी स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि परमेश्‍वर ने हमें इन रिश्तों में बाँधा है, तो इसके पीछे अवश्य ही कोई कारण होगा जिसे केवल परमेश्‍वर ही जानता है, और वह चाहता है कि हम इन रिश्तों पर ध्यान दें।

यदि आपके प्रियजन आवश्यकता में हैं और आप उनकी सहायता करने में सक्षम हैं, तो इसे अनदेखा न करें क्योंकि ऐसा करने से आप परमेश्‍वर को ठेस पहुँचाते हैं। इसके विपरीत आप उस व्यक्ति तक पहुँच जाएँ और उसकी सहायता हर उस सम्भव तरीके सें करें जिस से आप कर सकते हैं क्योंकि ऐसा करने से आप परमेश्‍वर के वचन के दृष्टिकोण से स्वयं को धर्मी ठहराया जाना प्रमाणित कर रहे हैं। अपने प्रियजनों की सहायता करने से आप निर्धन नहीं हो जाएंगे अपितु आपके विश्‍वास का यह कार्य आपको परमेश्‍वर की निकटता में ले जाएगा और आप बहुतायत के साथ आशीषित ठहरेंगे।

अपने बुज़ुर्ग माता पिता की देखभाल करें, उनकी सेवा करें और उन्हें उनकी बुज़ुर्गी में त्याग न दें। सदैव स्मरण रखें कि जब आप बोल, चल, खा और पी नहीं सकते थे तब आपके माता पिता ने आपको त्यागा नहीं था। स्वयं को परमेश्‍वर के सामने अपने रिश्तेदारों की देखभाल करते हुए ईमानदार प्रमाणित करें क्योंकि परमेश्‍वर बेईमान और अविश्‍वासी लोगों को पसन्द नहीं करता है। आमीन।


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