हमारी टीम

graham

ग्राहम फ़ोर्ड
संस्थापक

imran

डेविड रोथफ़ुस
निदेशक

मारिया
संचालक – उर्दू अनुभाग

 

हमारा लक्ष्य

“यीशु मसीह मुसलमानों के लिए” एक ग़ैर-लाभकारी संगठन है, जिस का लक्ष्य गवाही, शिष्यत्व, चर्च स्थापन और जे.सी.एम. केंद्र के माध्यम से मसीह के राज्य में मुसलमानों को आमंत्रित करना है। पृथ्वी पर 1.6 अरब ऐसे लोग हैं जो मुक्ति के उस सच्चे रास्ते से परिचित नहीं जो केवल यीशु मसीह उन्हें दे सकता है। भाषा, कानून, भय और ज्ञान की कमी आदि कुछ ऐसे कारण हैं जिन की वजह से इन 1.6 अरब लोगों ने अभी तक यीशु मसीह को अपने मुक्तिदाता के रूप में नहीं अपनाया है।

हमारा संगठन इस्लामी दुनिया में मसीह के संदेश का प्रचार करता है और उन्हें फ़ैसले के दिन की वास्तविकता के बारे में जागरूक कराता है। हमारा लक्ष्य इस दुनिया के हर मुसलमान को यीशु मसीह से परिचित कराना है चाहे वह किसी भी भाषा, जाति और नस्ल से सम्बंधित हो। मसीही के तौर पर हम तब तक संतुष्ट न होंगे जब तक कि हम हर बेख़बर मुस्लिम को यह एहसास न दिल दें कि उस की मुक्ति का असली स्रोत सिर्फ यीशु मसीह हैं और उस परमेश्वर के पुत्र के बिना उन का जीवन अधूरा है।

हमारी टीम कई विशेषज्ञों और उच्च शिक्षित व्यक्तियों से मिल कर बनी है जैसे कि वह मुसलमान जो इस्लाम को छोड़ चुके हैं, पादरी, मिशनरी और कई और लोग जो हमारे संगठन “यीशु मसीह मुसलमानों के लिए” को चलाने में अलग अलग तरह से अपना योगदान देते हैं। एक टीम के रूप में हम सभी मुसलमानों को यीशु मसीह के प्रेम और उस की माफ़ी के बारे में अवगत कराना चाहते हैं। हमारे मिशन की प्रेरणा बाइबल के निम्नलिखित शब्दों पर आधारित है:

मत्ती 28:18-20 फिर यीशु ने उनके पास जाकर कहा, “स्वर्ग और पृथ्वी पर सभी अधिकार मुझे सौंपे गये हैं। सो, जाओ और सभी देशों के लोगों को मेरा अनुयायी बनाओ। तुम्हें यह काम परम पिता के नाम में, पुत्र के नाम में और पवित्र आत्मा के नाम में, उन्हें बपतिस्मा देकर पूरा करना है। वे सभी आदेश जो मैंने तुम्हें दिये हैं, उन्हें उन पर चलना सिखाओ। और याद रखो इस सृष्टि के अंत तक मैं सदा तुम्हारे साथ रहूँगा।”

हमारे संगठन के लक्ष्य:

A3 50 (2)
मुस्लिम दुनिया को सूचित करना कि यीशु मसीह (परमेश्वर के पुत्र) वास्तव में कौन हैं।

A5 50
उन मुसलमानों को यीशु का शिष्य बनाना जो उस के साथ रिश्ता रखने के इच्छुक हैं।

A4 50
मसीहियों को उचित तरीके से प्रशिक्षित करना ताकि वे मुसलमानों के लिए एक प्रभावशाली गवाही बन सकें।

A2 50
जे.सी.एम. केंद्र के माध्यम से मुस्लिम दुनिया में मिशनरियों को भेजना।

A150
गिरजाघरों, मीडिया, और ग़ैर सरकारी संगठनों के साथ साझेदारी करना ताकि मुस्लिम दुनिया को हर संभव तरीके से मसीह का सन्देश भेजा जा सके।

 


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